bridge kya hai aur bridge kitne prakar ke hote hain

दोस्तों आप networking devices के बारे में जानते हैं तो आप Bridge का नाम जरूर सुना होगा. आपके मन में जरूर यह सवाल आया होगा कि bridge kya hai और इसका काम क्या होता है, bridge kitne prakar ke hote hain. तो आज हम बात करने वाले हैं bridge kya hai

आपको मैं एक सिंपल सा उदाहरण देता हूं जो आप अच्छे से समझ पाएंगे. नेटवर्क ब्रिज के बारे में जानने से पहले हम जानेंगे कि ब्रिज क्या होता है. Bridge का मतलब यह होता है कि एक जगह जहां पर हम जा नहीं सकते या जाने के लिए बहुत असुविधाएं आती हैं, वहां पर एक ब्रिज का निर्माण किया जाता है. क्योंकि हमने उस जगह को जा सके. ठीक उसी तरीके से नेटवर्किंग ब्रिज का काम नेटवर्क में एक जैसे ही होते हैं। तो बिना देर किए आइए जान लेते हैं कि ब्रिज क्या होता है.

Bridge Kya Hai

कंप्यूटर नेटवर्क में हम ब्रिज को LAN को connect करने के लिए इस्तेमाल करते हैं.अब आपके मन में यह सवाल आ रहा होगा कि LAN को कनेक्ट करने के लिए हम hub का भी इस्तेमाल कर सकते हैं,पर हम LAN को कनेक्ट करने के लिए bridge को क्यों इस्तेमाल करेंगे.पर आपको यह याद रखना होगा कि bridge के सहायता से हम दो अलग-अलग LAN को connect कर सकते हैं. अब आपको समझ आया गया होगा कि हम LAN को कनेक्ट करने के लिए bridge क्यों इस्तेमाल करते हैं.

अगर हम bridge का यूज कर रहे हैं तो हो सकता है कि हम एक तरफ Token ring का इस्तेमाल कर रहे हैं, जहां पर रिंग टोपोलॉजी है और दूसरी तरफ हम इस्तेमाल कर रहे हैं टोकन बस को जहां पर बस टोपोलॉजी है. bridge डिवाइस राउटर डिवाइस की तरह होते हैं पर bridge device डाटा को एनालाइज नहीं करते हैं.

उनको इस से मतलब नहीं होता कि वह क्या आगे forward कर रहे हैं. इसीलिए डाटा ट्रांसफर की मामला में bridge बहुत फास्ट होते हैं बर यह राउटर के जैसे ज्यादा versatile नहीं होते.ब्रिज डाटा को अलग अलग protocol में transfer करते है.ये ‘OSI MODEL’ से data link layer में या level 2 पे operate होते हैं.

Bridge कोनसा layer पे काम करती हे

Bridge के पास कुछ function होता हें जिसके द्वारा bridge काम करता हे। इनमे से एक हे कंटैंट का Filter करना। ये MAC ADDRESS को read कर सकता हें। और आपको जरूर पता होगा की MAC address पे दोनों Source और destination का पता रहता हे.

Basically, इसका इस्तेमाल हम 2 LAN को कनैक्ट करने के लिए एस्टेमाल करते हें जो की एक प्रकार की protocol पे काम करती हें. bridge में 2 पोर्ट रहती हें। एक Input और एक Output के लिए। ये OSI MODELS और DATA link layer पे काम करता हें। Bridge Traffic का डाटा लोड करने में बोहोत helpful होती हैं इसीलिए ये segments/packet को divide कर देती हैं। Bridge का उपयोग LAN और दूसरी नेटवर्क्स में traffic load को कम करने के लिए इस्तेमाल किया जाता हैं. ये passive device कि तरह होती हैं क्यों कि ब्रिज और path of bridging में कोई interaction नहीं होती.

Bridge काम कैसे करता हैं (how bridge works)

ब्रिज काम केसे करता है
ब्रिज काम केसे करता हैं

bridge incoming network traffic data को Inspect करता हैं और ये निर्णय लेता है कि उसने पैकेट को आगे भेजेगा या नहीं;ये उसकी destination के उपर depend करता हैं. नेटवर्क ब्रिज 2 layer (data link & OSI model)पे काम करती हैं. ये multiple Network segments को उसकी layer के साथ कनेक्ट करने का काम करती हैं। Bridge ट्रैफिक traffic को broadcast तो करता है उसके साथ-साथ ट्रैफिक को Manage भी करते हैं.

Network segments में bridge frame send करने के लिए उसके अंदर एक टेबल होती है जिसको हम “Bridge Table” बोला जाता है. पहले यह Table खाली होता है और ये ब्रिज के द्वारा filled होती है. ये तब filled होती है जब ये Nodes (computers) से frames को receive करता है जो Network Segments के साथ attach होती है. और ये टेबल को हम Forwarding database के नाम से जानते हैं.

जब ये Network nodes से frame receive करता है ब्रिज पहले टेबल को check करता है और उन्ही MAC address से destination को ढूंढता है. इसी MAC address से वो ये पता लगाने की कोशिश करता है कि network segments में उसी frame के साथ क्या करना है – Filter, Flood या Copy.

ब्रिज कितने प्रकार की होते हे (Types Of Bridge)

पहले हमने देखा कि ब्रिज कैसे काम करता है। पर ब्रिज का उसके प्रकार के अनुसार अलग-अलग काम होती है. तो चलिए देखते हैं यह कितने प्रकार के होते हैं और उसके काम क्या होता है।

Transparent Bridge

ट्रांसपोर्ट ब्रिज में जो स्टेशन होते हैं वह ब्रिज के existance को लेकर completely unaware होते हैं. इसका मतलब यह हुआ कि ब्रिज कब नेटवर्क में add हुआ और delete हुआ स्टेशन को पता नहीं रहता है. इसी टाइप के ब्रिज को ज्यादातर दो काम के लिए इस्तेमाल किया जाता है. 1.Bridge forwarding 2.Bridge Learning.

जब यह Process चालू रहता है वो खुद एक ‘Bridging Table’ create करता है जहां पर ये बोहोत अलग अलग terminals के MAC address को स्टोर करके रखा हुआ होता हैं.जब ब्रिज दोबारा पैकेट को किसिके पास भेजता है यही address packets को exact location में पहुंचाने में सहायक होता हैं.पर जब MAC address frame को ‘bridging table’ से नहीं पाता है तब उस contents को प्रति terminals में forward कर देता हैं जो LAN के terminals के साथ जुड़े रहते हैं. यही काम transparent bridging का होता हैं.

Source Routing Bridge

इसी टाइप के ब्रिज routing operation को शो करते हैं जो source station के द्वारा performed होते है.यहां frames decide करते हैं कि वो किस route को follow करेंगे.

Source Routing Bridge में host चाहे तो खुद frame को discover करता है पर इसीलिए उसको पहले special frames को भेजना होता हैं. इसको discovery frames के नाम से भी जानते हैं. ये पूरे नेटवर्क में होता है जहां इसका destination तक possible path linked होता हैं.

Transparent Learning Bridge

इसी तरह के ब्रिज router decision के लिऐ एक से ज्यादा नेटवर्क सेगमेंट्स को दूसरे ब्रिज के साथ जोड़ने का काम करता है. ये इस्तेमाल करता है MAC address को क्यों कि port के साथ जितना भी incoming Nodes होते हैं filtering करने के लिए.जो frames का destination उन्हीं same पोर्ट पे होती है एवं incoming frames को MAC destination के द्वारा associated port तक फॉरवर्ड करती है. ये 2 तरह कि mode में होते हैं 1. Store & Forward 2. Cut-Through

Transparent Spanning Tree Bridge

ये ‘subnet’ को पूरे topology में use करते हैं so ये एक Loop free operation create होता हैं.ये सभी destination address को routing table के माध्यम से चेक करता हैं उनके अंदर ये कहां पर situated होते हैं. ऐसी टाइप्स के bridge को ज्यादा information की जरूरत होती हैं so ये bridge port को database में stored करके रखता है।

Network-Bridge की फायदा (Advantages)

  • Bridge का configuration mode simple होती है।
  • इसको इस्तेमाल करना अतीब सहज होती है और ये दूसरे networking devices के तुलना से सस्ता (cheap) में मिलजाती है।
  • ये Switch के alternative के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है और इसके सहायता से हम MICRO SEGMENTATION किया जा सकता है।
  • इसका और एक मुख्य फायदा है data link layer पे लोड को कम करता। हैं।
  • ब्रिज ज्यादा reliable होता हैं यदि उनमें से किसी bandwidth utilization decrease होता हैं।

Network-Bridge के नुकसान (disadvantages)

  • ये कुछ specific IP address को पढ़ नहीं सकता।
  • bridge MAC को लेकर ज्यादा Concern होता हें।
  • हम इसको communication network में इस्तेमाल नहीं कर सकते जब ये different architectures को use करता है।
  • इसका और एक नुकसान ये है कि ये सभी प्रकार के Message को broadcast कर देता है और उस मैसेज को लिमिट करने में uncapable हैं।
  • ये repeater और hub से ज्यादा expensive है।

Conclusion

आज हमने बताया कि bridge kya hai और bridge kitne prakar ke hote hain. हमें उम्मीद है आपको bridge kya hai समझ आया होगा. हमारा कोशिश ही रहता है कि हम आपको जो भी चीजें बता रहे हैं उसके बारे में सारी जानकारी देने के लिए कोशिश करें. यदि आज का लेख bridge kya hai में हमने किसी भी तरह का चीजें छोड़ दिया हो तो आप हमें कमेंट में बता सकते हैं,

Manas Ranjan

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